अयोध्यापती "श्रीराम" सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के कर्ता गुरु है।
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Friday, 11 April 2014

रामनवमी २०१४ फोटो - तळीभरण विधी, रामजन्म, पूजन, यज्ञ, हंडीप्रसाद

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Ramnavamiyaag hawan
श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ

Ramnavami Renuka maata Pujan
रेणूका माता का पूजन करते हुए महाधर्मवर्मन डॉं योगिंद्रसिंह और विशाखावीरा जोशी के साथ श्रीमान चेतनसिंह और नम्रतावीरा दाभोलकर

Ramnavami Renuka maata Pujan
रेणूका माता का पूजन करते हुए महाधर्मवर्मन डॉं योगिंद्रसिंह और विशाखावीरा जोशी के साथ श्रीमान चेतनसिंह और नम्रतावीरा दाभोलकर 

Ramnavami Ramjanma
श्रीराम जन्म के दौरान नम्रतावीरा पालना झुलाते हुए नम्रतावीरा दाभोलकर और इस क्षण की अनुभूती लेते हुए मीनावीरा महाजन, आशावीरा कुलकर्णी, कल्पनावीरा कर्णिक, उषावीरा जावले, वर्षावीरा वैद्य, नीतावीरा दलवी, सुनिलावीरा कुलकर्णी, रीटावीरा निचनाकी, शीलावीरा चौबल, अनितावीरा मुरुडकर, उषावीरा कुंजीर, अश्वीनीवीरा पवार, रिटावीरा केशकामत, संगितावीरा वर्तक, विशाखावीरा दामले.

Handi Prasad
हंडीप्रसाद के लिए चुल्हा जलाते हुए श्री अनिरुद्ध बापू

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हंडी प्रसाद की सामग्री हंडी में डालते हुए श्री अनिरुद्ध बापू 

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श्री साई राम सहस्त्र यज्ञ करते हुए श्रीमान सत्यप्रसादसिंह और श्रीमती मिथिलेषवीरा बाजपयी, श्रीमान शेखरसिंह और शुभदावीरा मयेकर..
होमकुड आहुती के लिए प्रभाकरसिंह कोरगा शेट्टी, मिहिरसिंह नगरकर, अमितसिंह कोलते, प्रसादसिंह धुवाली, अमितसिंह फाटक, पुष्करसिंह तेरडे, पुष्करसिंह गोखले इन्हे सुअवसर मिला था

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तळीभरण विधी करते हुए श्री अनिरुद्ध बापू, नंदाई और सुचितदादा


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Thursday, 3 April 2014

रामनवमी उत्सव के बारे में

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रामनवमी उत्सव

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन की तरफ से हरसाल "श्रीरामनवमी उत्सव" बडे ही उत्साह में मनाया जाता है।

श्री सहस्त्रधारा अभिषेक:
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श्री सहस्त्रधारा अभिषेक
रेणुका माता के मुर्तीपर मंत्रोच्चारण करके और एक खास अभिषेकपात्र का इस्तेमाल करते हुए सहस्त्रधारा अभिषेक किया जाता है। सर्व श्रद्धावानों के लिये यह अभिषेक होते देखना और मंत्रजाप सुनना निश्चित रूप से एक महान सुअवसर है। 

श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ:

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श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ
इस यज्ञ का प्रारंभ सुबह होता है। इस यज्ञ को ’श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ’ कहते है। साईनिवास से ’श्री दीपशिखा’ उस स्थलपर लायी जाती है। इस तारक मंत्र का उच्चारण करते समय हर एक श्रद्धावान आहुती दे सकता है। यह अर्पण करने से हर एक के तन और मन को सकारात्मक स्पंदने प्राप्त होती है। मन को सामर्थ्य प्राप्त होता है और इससे पिछले जन्म के पापों का भी भर्जन होता है। "आपत्ति निवारक समिधा" इस यज्ञ के दौरान उपलब्ध होती है। 

श्री रामवरदायिनी महिषासुरमर्दिनी पूजन:

आदिमाता महिषासुरमर्दिनीके आशीर्वाद से श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। श्री अनिरुद्धजी ने यह कथा विस्तारपूर्वक ’श्री मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ में बतायी है। इसलिये "श्री रामवरदायिनी आदिमाता महिषासुरमर्दिनी" का पूजन इस दिन किया जाता है। 

रामजन्म:


रामजन्म
रामजन्म
सद्गुरु श्री अनिरुद्ध की उपस्थिति में ठीक १२ बजे के समय ’श्री रामजन्म’ पारंपारिक रीति से मनाया जाता है। बापू के लिये बचपन में जो पालना इस्तेमाल किया गया था उसी पालने का उपयोग यहाँ पर किया जाता है। स्त्री एवं पुरुष यह पालना झुलाते हुए ’कुणी गोविंद घ्या कुणी गोपाळ घ्या’ यह लोरी गाते है। इसके बाद श्रीराम का नामकरण समारोह होता है और प्रसाद रूप में ’सुंठवडा’ (सोंठ युक्त पंजीरी) बाटा जाता है। यह पालना भक्तों को दर्शन के लिये पूरे दिन स्टेज पर रखा जाता है।

श्री साई सत्पूजन:
श्री साईसत्पूजन
श्री साईसत्पूजन
साईबाबाने हेमाडपंत को सौंपी तीन चीजें याने ’रुद्राक्ष, त्रिशूल और शालीग्राम’ पूजन के लिये उत्सव स्थल पर लाए जाते है। सभी लोग ’श्री घोरकष्टोद्धरण’ स्तोत्र का दिनभर पठण करते हुए ’श्री साईसत्पूजन’ करते है।

श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक:
श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक
श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक
श्री साईनाथजी की सदाशिव मूर्तिपर अभिषेक किया जाता है। यह विधी ’श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक’ स्वरूप में की जाती है। हर एक श्रद्धावान इस अभिषेक विधी में भाग ले सकता है। यह अभिषेक सकल कुटंब के स्वास्थ्य मुख्यतः बच्चों के आरोग्य के लिये अत्यंत उपयुक्त एवं फलप्रद है।

तलीभरण:
तलीभरन
तलीभरन
रामनवमी के दिन तलीभरन किया जाता है। इस तलीभरन का प्रारंभ श्री अनिरुद्ध बापू करते हैं। अनेकविध वाद्य और ’श्री साईराम जाप’ करते हुए यह विधि संपन्न होती है। जो यह तलिभरन विधि में शामिल होता है उसे पॉंच भूखें लोगोंको खाना खिलाने का पुण्य प्राप्त होता है। इसका प्रसाद सभी नौ प्रकार के प्रसादोंमें श्रेष्ठ माना जाता है। इस विधि में सहभागी होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अखंड जप:

रामनवमी के पवित्र दिन, ’ॐ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय नम:’ अखंड पठन किया जाता है। यह पठन भी सद्गुरु श्री अनिरुद्ध की उपस्थिति में किया जाता है। जो भक्त इस मंत्र का जाप करते है वह एक दूसरे को नमस्कार करके एक दूसरे के माथे पर बुक्का लगाते है। यह करने के पीछे की भावना अत्यंत विलक्षण है। जो इन्सान अपने माथेपर यह बुक्का लगाता है वह भक्तश्रेष्ठ पुंडलिक का रूप माना जाता है और जो भक्त अपने हाथोंसे यह लगाते हैं वह हाथ भी साक्षात भक्तश्रेष्ठ पुंडलिक के ही माने जाते हैं। इस भावना को ध्यान मे रखते हुए हर एक श्रद्धावान यह अबीर लगाते हैं और मंत्रजाप करते हैं। जो इसकी अनुभूती लेते है अमित और अद्वितीय आनंद प्राप्त करते है।

श्री साईसच्चरित अध्ययन कक्ष:


’आद्यपिपादादा’ कक्ष
’आद्यपिपादादा’ कक्ष
इस अध्ययन के लिये एक अलग ’आद्यपिपादादा’ कक्ष निर्माण किया जाता है। इस कक्षामें अखंड साईसच्चरित का पठण किया जाता है। आद्यपिपा याने श्री सुरेशचंद्र पांडुरंग दत्तोपाध्ये. श्री साईनाथ के एक उत्साही भक्त और बापू के सच्चे अनुयायी। वह हर साल, चार बार याने रामनवमी, गुरुपौर्णिमा, कृष्णाष्टमी और दशहरे पर श्री साईसच्चरित का पारायण करते थे। उनका यह नियम करिबन साठ सालसे था। उनका यह साप्ताहिक पाठ कृष्णाष्टमी की दोपहर को खत्म होता था। कृष्णाष्टमी के ही दिन उनका स्वर्गवास हुआ। यह साईनाथ का अभिसंवाहन था जो उन्होंने जीवनभर किया। ११ वे अध्याय में लिखा ’अखंड राम लाधाल’ उनके जीवन में सच साबित हुआ। साई सतच्चरित पढने से पहले हर एक भक्त जो इस कक्षामें आता है वह उनके जैसा बनना चाहता है।

श्री अनिरुद्ध हंडी प्रसाद:
हंडी प्रसाद
हंडी प्रसाद
इस पवित्र पावन दिवसपर, हर एक श्रद्धावान सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के शुभ हाथोंसे पावन हुआ हंडी प्रसाद का लाभ ले सकते है। यह बनाते समय, बापू स्वयं इस हंडीमे आवश्यक सामग्री डालकर उसे चलातें हैं। यही इस प्रसाद की खासियत है। यह हंडी प्रसाद हर एक को ’श्री साईसच्चरित’ मे वर्णित हंडी प्रसाद की याद दिलाता है। इस प्रसाद का स्वाद एकमेव अद्वितीय और अवर्णनीय होता है। हर एक भक्त जाने से पहले यह प्रसाद अवश्य ग्रहण करके जाता है। 

रात को, श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ की पूर्णाहुती एवं महाआरती पश्चात यह समारोह संपन्न होता है। हर एक श्रद्धावान स्वयं इस पूरे अद्‍भूत रामनवमी उत्सव का लाभ ले सकता है। 
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