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अयोध्यापती "श्रीराम" सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के कर्ता गुरु है।

Monday, 28 April 2014

Traditional naming ceremony of Lord Shree Ram Video


Ramacha-Palana-Bala-jo-jo-re
Video of Ramacha Palana - Bala Jo Jo re



Traditional naming ceremony of Lord Shree Ram perform by Shraddhavan ladies in presence of Sadguru Shree Aniruddha Bapu and His family on the event of ShreeRamNavami

Thursday, 24 April 2014

Ramanavami 2014 - Renuka Mata Poojan Video


Tuesday, 22 April 2014

Ramnavami 2014 - Bapu, Nandai, Suchitdada Aagaman




Monday, 14 April 2014

रामनवमी २०१४ फोटो - आद्य पिपा कक्ष, साई सत पूजन, महाआरती

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महाआरती करते हुए मृणालवीरा और गणपतीसिंह देसाई, आशुतोषसिंह और राखीवीरा वैद्य, शिरिषसिंह आउर प्राचीवीरा पुराणीक, मीनाक्षीवीरा और भास्करसिंह भोंसळे, निशावीरा और कोमलसिंह राजपूत, श्रीमती और श्रीमान राजेश सरैय्या


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चरखा वस्त्र योजना के काऊंटरपर रामनवमी के दिन लडी जमा की जा रही थी

गणपती की इको फ्रेंडली मुर्तीयों को निहारते हुए अनिरुद्ध बापू

अखंड साई राम जप करते हुए अनिरुद्ध बापू, सुचितदादा और नंदाई...
परमेश्वरसिंह सुवर्णा,अजयसिंह भिसे, निनादसिंह घोलकर, रेणूवीरा सिंग, इंदुमतिवीरा शेंडगे, सुनितावीरा कंरडे इन श्रद्धावानो को बापू, आई, दादाने अबीर तिलक लगाया।

आद्य पिपा कक्ष में साईसतचरित्र पठण करते हुए श्रद्धावान और इस पठण का आनंद लेते हुए अनिरुद्ध बापू
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साई सत पूजन करते हुए आदेशसिंह और शर्मिलावीरा कोटेणकर और श्रीमती और श्रीमान मोहिले 


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                                       दत्तगुरू की महाआरती करते हुए अनिरुद्ध बापू




Friday, 11 April 2014

रामनवमी २०१४ फोटो - तळीभरण विधी, रामजन्म, पूजन, यज्ञ, हंडीप्रसाद

Ramnavamiyaag hawan
श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ

Ramnavami Renuka maata Pujan
रेणूका माता का पूजन करते हुए महाधर्मवर्मन डॉं योगिंद्रसिंह और विशाखावीरा जोशी के साथ श्रीमान चेतनसिंह और नम्रतावीरा दाभोलकर

Ramnavami Renuka maata Pujan
रेणूका माता का पूजन करते हुए महाधर्मवर्मन डॉं योगिंद्रसिंह और विशाखावीरा जोशी के साथ श्रीमान चेतनसिंह और नम्रतावीरा दाभोलकर 

Ramnavami Ramjanma
श्रीराम जन्म के दौरान नम्रतावीरा पालना झुलाते हुए नम्रतावीरा दाभोलकर और इस क्षण की अनुभूती लेते हुए मीनावीरा महाजन, आशावीरा कुलकर्णी, कल्पनावीरा कर्णिक, उषावीरा जावले, वर्षावीरा वैद्य, नीतावीरा दलवी, सुनिलावीरा कुलकर्णी, रीटावीरा निचनाकी, शीलावीरा चौबल, अनितावीरा मुरुडकर, उषावीरा कुंजीर, अश्वीनीवीरा पवार, रिटावीरा केशकामत, संगितावीरा वर्तक, विशाखावीरा दामले.

Handi Prasad
हंडीप्रसाद के लिए चुल्हा जलाते हुए श्री अनिरुद्ध बापू

Aniruddha bapu-Handi Prasad
हंडी प्रसाद की सामग्री हंडी में डालते हुए श्री अनिरुद्ध बापू 

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श्री साई राम सहस्त्र यज्ञ करते हुए श्रीमान सत्यप्रसादसिंह और श्रीमती मिथिलेषवीरा बाजपयी, श्रीमान शेखरसिंह और शुभदावीरा मयेकर..
होमकुड आहुती के लिए प्रभाकरसिंह कोरगा शेट्टी, मिहिरसिंह नगरकर, अमितसिंह कोलते, प्रसादसिंह धुवाली, अमितसिंह फाटक, पुष्करसिंह तेरडे, पुष्करसिंह गोखले इन्हे सुअवसर मिला था

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तळीभरण विधी करते हुए श्री अनिरुद्ध बापू, नंदाई और सुचितदादा


Thursday, 10 April 2014

रामनवमी २०१४ फोटो - औक्षण

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रामनवमी २०१४ का उत्सव बडे उत्साह के साथ मनाया गया। रेणूकामाँ के आल्हाददायी पूजनसे, रामजन्म के मनोहरी विधि के साथ सभी पूजन विधियों में श्रद्धावान बड़ी ही अात्मीयतासे सहभागी हुए।  इस रामनवमी उत्सव के कुछ यादगार पल हम देखनेवाले है।



रेणूकामाता के आगमन दौरान श्रीमती सोनालीवीरा और श्रीमान डॉ. सुहाससिंह घोलकर, श्रीमती पूनमवीरा और श्रीमान कपिलसिंह बोडके इन्हे औक्षण का सुअवसर प्राप्त हुआ ।

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सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू का आगमन लगभग दोपहर के १२. १५ पर हुआ। आगमन के शुरुआत में बापू का औक्षण किया गया। श्रीमती बीनावीरा और श्रीमान प्रदिप सायंगावकर, श्रीमती आशावीरा और श्रीमान विश्वनाथसिंह बडकर, श्रीमती शुभावीरा और श्रीपादसिंह म्हात्रे, श्रीमती भारतीवीरा और शेशगिरिसिंह शेट्टी, श्रीमती रीतुवीरा चौहान, सुखदावीरा वैद्य, ज्योत्स्नावीरा शर्मा इन सब को इस साल औक्षण का सुअवसर प्राप्त हुआ था।


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Monday, 7 April 2014

Photos of Raam Navami Utsav 2004

सद्गुरु श्री अनिरुद्ध उपासना ट्रस्टद्वारा आयोजित रामनवमी उत्सव २००३ के कुछ यादगार पल....

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बापू हंडी प्रसाद बनाते हुए 

Dindi-Yatra
दिंडी यात्रा में सहभागी श्रद्धावान 

परमपूज्य बापू  का आगमन 

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परमपूज्य बापू जी का आगमन 


Handi Prasad
हंडी प्रसाद 



Sadguru Darshan
भक्तो को दर्शन देते हुए अनिरुद्ध बापू


Aniruddha Bapu
 अनिरुद्ध बापू






HD-Wallpaper रामो राजमणी सदा विजयते

aniruddha raam
HD-Wallpaper रामो राजमणी सदा विजयते

रामो राजमणी सदा विजयते।
रामं रमेशं भजे

रामेणाभियत निशाचरचमू

by Manishsinh Naik
Aniruddha Kaladalan
 

HD Wallpaper - राम जन्मला गं बाई, राम जन्मला

HD Wallpaper - राम जन्मला गं बाई, राम जन्मला
HD Wallpaper - राम जन्मला गं बाई, राम जन्मला

Saturday, 5 April 2014

Talibharan by Aniruddha Bapu



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Talibharan Video


तलीभरण : 


रामनवमी के दिन तलीभरन किया जाता है। इस तलीभरन का प्रारंभ श्री अनिरुद्ध बापू करते हैं। अनेकविध वाद्य और ’श्री साईराम जप’ करते हुए यह विधि संपन्न होती है। जो यह तलिभरन विधि में शामिल होता है उसे पॉंच भूखें लोगोंको खाना खिलाने का पुण्य प्राप्त होता है। इसका प्रसाद सभी नौ प्रकार के प्रसादोंमें श्रेष्ठ माना जाता है। इस विधि में सहभागी होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।



Friday, 4 April 2014

Handi Prasad Preparation By Aniruddha Bapu

Aniruddha Sai handi Prasad
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श्री अनिरुद्ध हंडी प्रसाद: 
इस पवित्र पावन दिवसपर, हर एक श्रद्धावान सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के शुभ हाथोंसे पावन हुआ हंडी प्रसाद का लाभ ले सकते है। यह बनाते समय, बापू स्वयं इस हंडीमे आवश्यक सामग्री डालकर उसे चलातें हैं। यही इस प्रसाद की खासियत है। यह हंडी प्रसाद हर एक को ’श्री साईसच्चरित’ मे वर्णित हंडी प्रसाद की याद दिलाता है। इस प्रसाद का स्वाद एकमेव अद्वितीय और अवर्णनीय होता है। हर एक भक्त जाने से पहले यह प्रसाद अवश्य ग्रहण करके जाता है।

Thursday, 3 April 2014

रामजन्माच्या वेळेस वापरण्यात येणार्‍या पाळण्याचे महत्त्व

Palana of Aniruddha Bapu
सदगुरु श्री अनिरुद्ध बापू ज्या पाळण्यात वाढले तोच हा अनिरुद्ध बापूंचा पाळणा

१८ नोव्हेंबर १९५६ त्रिपुरारि पौर्णिमा ह्या दिवशी श्री अनिरुद्धांचा पहाटे ४ वाजुन ३५ मिनिटांनी जन्म झाला.

२९ नोव्हेंबर १९५६ रोजी संध्याकाळी ४ वाजुन ३५ मिनिटांनी अनिरुद्ध हे नाव पणजी द्वारकाबाई पाध्ये (माई), बापूंच्या आजी शकुंतालाबाई पंडित व अरुंधती माता ह्या तीन मातांनी श्री गोपीनाथ शास्त्री पाध्ये (बापूंचे मानवी सद्‌गुरु व पणजोबा) ह्यांच्या दृष्टांतानुसार ठेवले.

हे नामकरण ज्या पाळण्यात झाले तोच हा पाळणा, सर्व भक्तांसाठी प्रचंड आदराचे व परम पावित्र्याचे स्थान.

अनिरुद्ध ह्या नामाच्या पवित्र उच्चरणाची साक्षीदार असलेली ही एकमेव चिरंतन वास्तु.

ह्या पाळण्याची दोरी ह्या तीन मातांनी सर्वप्रथम ओढली तो क्षण अजर व अमर आहे.

Devotee Meena Vahini at Ram Janma - Ramnavami Utsav 2003

Aniruddha Ram Meena vaini



Late Meena Vaihini (Meena Govind Dhabolkar (Grand Daughter in law of Saisaccharitra Writer Govind Raghunath Dabholkar known as Hemadpant)


श्रीरामरक्षा स्तोत्रं


Ramraksha
श्रीरामरक्षा स्तोत्र

श्री गणेशायः नमः।


अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य । बुधकौशिक ऋषि: 
श्रीसीतारामचन्द्रो देवता । अनुष्टुप्छन्द: । सीता शक्ति: 
श्रीमान् हनुमान् कीलकम् 
श्रीरामचन्द्रप्रीत्यर्थे जपे विनियोग: ।



अथ ध्यानम्

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं 
पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम् ।

वामाङ्कारूढसीतामुखकमलविलल्लोचनं नीरदाभं 
नानालङ्कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलं रामचन्द्रम् ॥



इति ध्यात्वा ।  


चरितं रधुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटापुकुटमण्डितम् ॥२॥

सासितूणधनुर्बाणपार्णि नक्तञ्चरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥३॥

रामरक्षां पठेत प्राज्ञ: पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघव: पातु भालं दशरथात्मज: ॥४॥

कौसल्येयो द्दशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल: ॥५॥

जिह्वां विद्यानिधि: पातु कण्ठं भरतवन्दित: ।
स्कन्धौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेशकार्मुक: ॥६॥

करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित् ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय: ॥७॥

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु: ।
ऊरू रघूत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत् ॥८॥

जानुनी सेतुकृत् पातु जङ्घे दशमुखान्तक: ।
पादौ विभीषणश्रीद: पातु रामोऽखिलं वपु: ॥९॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठेत् ।
स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥१०॥

पातालमूतलव्योमचारिणश्छद्मचारिण: ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि: ॥११॥

रामेति रामभद्रेति रामचन्द्रेति वा स्मरन् ।
नरो न लिप्यते पापैर् भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥१२॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
य: कण्ठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्धय: ॥१३॥

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत् ।
अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमङ्गलम् ॥१४॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर: ।
तथा लिखितवान् प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक: ॥१५॥

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम् ।
अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान् स न: प्रभु: ॥१६॥

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्वरौ ॥१७॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥१८॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
रक्ष: कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥१९॥

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशावक्षयाशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रत: पथि सदैव गच्छताम् ॥२०॥

संनद्ध: कवची खङ्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन्मनोरथोऽस्माकं राम: पातु सलक्ष्मण: ॥२१॥

रामो दाशरथि:  शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघूत्तम: ॥२२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम: ।
जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेयपराक्रम: ॥२३॥

इत्येतानि जपन्नित्यं मद्भक्त: श्रद्धयान्वित: ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशय: ॥२४॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम् ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरा: ॥२५॥

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापति सुन्दरं
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धामिंकम् ।
राजेन्द्रं सत्यसन्धं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्ति 
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम् ॥२८॥

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम: ॥२७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥२८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि
श्रीरामचन्द्रचरणौ  वचसा गृणामि ।
श्रीरामचन्द्रचरणौ  शिरसा नमामि 
श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥२९॥

माता रामो मत्पिता रामचन्द्र: 
स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं 
जाने नैव जाने न जाने ॥३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥३१॥

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम् ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥३२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये ॥३३॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम् ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम् ॥३४॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥३५॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
तर्जनं यमद्‌तानां रामरामेति गर्जनम् ॥३६॥

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे 
रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम: ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं 
रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर ॥३७॥

राम रामेति रामेति रमे मनोरमे ।
सहस्रनामतत्तुल्यं रामनाप वरानने ॥३८॥



इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

॥ श्रीसितारामचंद्रार्पणमस्तु ॥  

रामाचा पाळणा - बाळा जो जो रे

Ramacha Palana
रामाचा पाळणा

बाळा जो जो रे कुळभूषणा । दशरथनंदना ।
निद्रा करि बाळा मनमोहना । रामा लक्षुमणा ॥धृ॥

पाळणा लांबविला अयोध्येसी । दशरथाचे वंशी ।
पुत्र जन्मला हृषीकेशी । कौसल्येचे कुशी ॥१॥

रन्तजडित पालखी  । झळके अलौकिक ।
वरती पहुडले कुलदिपक । त्रिभुवननायक ॥२॥

हालवी कौसल्या सुंदरी । धरुनी ज्ञानदोरी ।
पुष्पे वर्षिली सुरवरी । गर्जती जयजयकारी ॥३॥

विश्‍वव्यापकां  रघुराया । निद्रा करी बा सखयां  ।
तुजवर कुरवंडी करुनिया । सांडिन आपुली काया ॥४॥

येऊनि वसिष्ठ सत्वर । सागे जन्मांतर ।
राम परब्रम्ह  साचार । सातवा अवतार ॥५॥

याग रक्षुनिया अवधारा । मारुनि रजनीचरा ।
जाईल सीतेच्या स्वयंवरा । उद्धरि गौतमदारा ॥६॥

परिणिल जानकी सुरुपा । भंगुनिया शिवचापा ।
रावण लज्जित महाकोपा  । नव्हे पण हा सोपा ॥७॥

सिंधूजलडोही अवलीळा । नामे तरतिल शिळा ।
त्यावरी उतरुनिया दयाळा । नेईल वानरमेळा ॥८॥

समूळ मर्दूनि रावण । स्थापिल बिभीषण ।
देव सोडविल संपूर्ण । आनंदेल त्रिभुवन ॥९॥

राम भावाचा भुकेला । भक्ताधीन झाला ।
दास विठ्ठले ऎकिला । पाळणा गाईला ॥१०॥

रामनवमी उत्सव के बारे में

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रामनवमी उत्सव

सद्‌गुरु श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन की तरफ से हरसाल "श्रीरामनवमी उत्सव" बडे ही उत्साह में मनाया जाता है।

श्री सहस्त्रधारा अभिषेक:
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श्री सहस्त्रधारा अभिषेक
रेणुका माता के मुर्तीपर मंत्रोच्चारण करके और एक खास अभिषेकपात्र का इस्तेमाल करते हुए सहस्त्रधारा अभिषेक किया जाता है। सर्व श्रद्धावानों के लिये यह अभिषेक होते देखना और मंत्रजाप सुनना निश्चित रूप से एक महान सुअवसर है। 

श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ:

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श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ
इस यज्ञ का प्रारंभ सुबह होता है। इस यज्ञ को ’श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ’ कहते है। साईनिवास से ’श्री दीपशिखा’ उस स्थलपर लायी जाती है। इस तारक मंत्र का उच्चारण करते समय हर एक श्रद्धावान आहुती दे सकता है। यह अर्पण करने से हर एक के तन और मन को सकारात्मक स्पंदने प्राप्त होती है। मन को सामर्थ्य प्राप्त होता है और इससे पिछले जन्म के पापों का भी भर्जन होता है। "आपत्ति निवारक समिधा" इस यज्ञ के दौरान उपलब्ध होती है। 

श्री रामवरदायिनी महिषासुरमर्दिनी पूजन:

आदिमाता महिषासुरमर्दिनीके आशीर्वाद से श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त की। श्री अनिरुद्धजी ने यह कथा विस्तारपूर्वक ’श्री मातृवात्सल्यविन्दानम्‌ में बतायी है। इसलिये "श्री रामवरदायिनी आदिमाता महिषासुरमर्दिनी" का पूजन इस दिन किया जाता है। 

रामजन्म:


रामजन्म
रामजन्म
सद्गुरु श्री अनिरुद्ध की उपस्थिति में ठीक १२ बजे के समय ’श्री रामजन्म’ पारंपारिक रीति से मनाया जाता है। बापू के लिये बचपन में जो पालना इस्तेमाल किया गया था उसी पालने का उपयोग यहाँ पर किया जाता है। स्त्री एवं पुरुष यह पालना झुलाते हुए ’कुणी गोविंद घ्या कुणी गोपाळ घ्या’ यह लोरी गाते है। इसके बाद श्रीराम का नामकरण समारोह होता है और प्रसाद रूप में ’सुंठवडा’ (सोंठ युक्त पंजीरी) बाटा जाता है। यह पालना भक्तों को दर्शन के लिये पूरे दिन स्टेज पर रखा जाता है।

श्री साई सत्पूजन:
श्री साईसत्पूजन
श्री साईसत्पूजन
साईबाबाने हेमाडपंत को सौंपी तीन चीजें याने ’रुद्राक्ष, त्रिशूल और शालीग्राम’ पूजन के लिये उत्सव स्थल पर लाए जाते है। सभी लोग ’श्री घोरकष्टोद्धरण’ स्तोत्र का दिनभर पठण करते हुए ’श्री साईसत्पूजन’ करते है।

श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक:
श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक
श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक
श्री साईनाथजी की सदाशिव मूर्तिपर अभिषेक किया जाता है। यह विधी ’श्री साईनाथ महिम्नाभिषेक’ स्वरूप में की जाती है। हर एक श्रद्धावान इस अभिषेक विधी में भाग ले सकता है। यह अभिषेक सकल कुटंब के स्वास्थ्य मुख्यतः बच्चों के आरोग्य के लिये अत्यंत उपयुक्त एवं फलप्रद है।

तलीभरण:
तलीभरन
तलीभरन
रामनवमी के दिन तलीभरन किया जाता है। इस तलीभरन का प्रारंभ श्री अनिरुद्ध बापू करते हैं। अनेकविध वाद्य और ’श्री साईराम जाप’ करते हुए यह विधि संपन्न होती है। जो यह तलिभरन विधि में शामिल होता है उसे पॉंच भूखें लोगोंको खाना खिलाने का पुण्य प्राप्त होता है। इसका प्रसाद सभी नौ प्रकार के प्रसादोंमें श्रेष्ठ माना जाता है। इस विधि में सहभागी होना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अखंड जप:

रामनवमी के पवित्र दिन, ’ॐ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय नम:’ अखंड पठन किया जाता है। यह पठन भी सद्गुरु श्री अनिरुद्ध की उपस्थिति में किया जाता है। जो भक्त इस मंत्र का जाप करते है वह एक दूसरे को नमस्कार करके एक दूसरे के माथे पर बुक्का लगाते है। यह करने के पीछे की भावना अत्यंत विलक्षण है। जो इन्सान अपने माथेपर यह बुक्का लगाता है वह भक्तश्रेष्ठ पुंडलिक का रूप माना जाता है और जो भक्त अपने हाथोंसे यह लगाते हैं वह हाथ भी साक्षात भक्तश्रेष्ठ पुंडलिक के ही माने जाते हैं। इस भावना को ध्यान मे रखते हुए हर एक श्रद्धावान यह अबीर लगाते हैं और मंत्रजाप करते हैं। जो इसकी अनुभूती लेते है अमित और अद्वितीय आनंद प्राप्त करते है।

श्री साईसच्चरित अध्ययन कक्ष:


’आद्यपिपादादा’ कक्ष
’आद्यपिपादादा’ कक्ष
इस अध्ययन के लिये एक अलग ’आद्यपिपादादा’ कक्ष निर्माण किया जाता है। इस कक्षामें अखंड साईसच्चरित का पठण किया जाता है। आद्यपिपा याने श्री सुरेशचंद्र पांडुरंग दत्तोपाध्ये. श्री साईनाथ के एक उत्साही भक्त और बापू के सच्चे अनुयायी। वह हर साल, चार बार याने रामनवमी, गुरुपौर्णिमा, कृष्णाष्टमी और दशहरे पर श्री साईसच्चरित का पारायण करते थे। उनका यह नियम करिबन साठ सालसे था। उनका यह साप्ताहिक पाठ कृष्णाष्टमी की दोपहर को खत्म होता था। कृष्णाष्टमी के ही दिन उनका स्वर्गवास हुआ। यह साईनाथ का अभिसंवाहन था जो उन्होंने जीवनभर किया। ११ वे अध्याय में लिखा ’अखंड राम लाधाल’ उनके जीवन में सच साबित हुआ। साई सतच्चरित पढने से पहले हर एक भक्त जो इस कक्षामें आता है वह उनके जैसा बनना चाहता है।

श्री अनिरुद्ध हंडी प्रसाद:
हंडी प्रसाद
हंडी प्रसाद
इस पवित्र पावन दिवसपर, हर एक श्रद्धावान सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू के शुभ हाथोंसे पावन हुआ हंडी प्रसाद का लाभ ले सकते है। यह बनाते समय, बापू स्वयं इस हंडीमे आवश्यक सामग्री डालकर उसे चलातें हैं। यही इस प्रसाद की खासियत है। यह हंडी प्रसाद हर एक को ’श्री साईसच्चरित’ मे वर्णित हंडी प्रसाद की याद दिलाता है। इस प्रसाद का स्वाद एकमेव अद्वितीय और अवर्णनीय होता है। हर एक भक्त जाने से पहले यह प्रसाद अवश्य ग्रहण करके जाता है। 

रात को, श्री साईराम सहस्त्र यज्ञ की पूर्णाहुती एवं महाआरती पश्चात यह समारोह संपन्न होता है। हर एक श्रद्धावान स्वयं इस पूरे अद्‍भूत रामनवमी उत्सव का लाभ ले सकता है। 
Copyright © 2015 Ramnavami Utsav